Weather News: हरियाणा में मौसम परिवर्तन से वैज्ञानिक भी हैरान, पहली बार मार्च से मई तक आए 19 पश्चिमी विक्षोभ
हिसार, Weather News :- आमतौर पर मई महीने में गर्मी का प्रचण्ड रूप दिखता है. मगर इस बार मई में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव पूरे हरियाणा में दिखा जिसकी वजह से बारिश और ओले आए. मई के 31 दिनों में मात्र 10 दिन ऐसे थे जिनमें Temperature 40 डिग्री से ऊपर गया. मई के महीने में 2 दिन ऐसे भी थे जब तापमान 45 डिग्री के करीब चला गया था. कल भी सुबह-सुबह हरियाणा में तूफान देखने को मिला जिसने हरियाणा के कई जिलों को प्रभावित किया.

जून के महीने में भी आ सकते है पश्चिमी विक्षोभ
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो जून के महीने में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) आ सकते हैं लेकिन वह हरियाणा को ज्यादा प्रभावित नहीं करेंगे. शनिवार सुबह आए तूफान ने सबसे ज्यादा हरियाणा के मध्य भाग पर अपना Effect डाला जिनमें कैथल, रोहतक, चरखी दादरी, रेवाड़ी, नारनौल, सोनीपत, गुरुग्राम और जींद के कुछ भाग शामिल है. यहाँ पर 70 से 80 किमी प्रति घंटे की Speed से हवाएं चली.
बारिश से तापमान हुआ कम
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग विभागाध्यक्ष डा. मदन खीचड़ ने कहा कि हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ से 23 मई रात से लगातार Weather बदलता रहा. इस दौरान लगातार दो पश्चिमी- विक्षोभ के Effect से राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में तेज हवाओं व गरजचमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा देखी गई और कुछ स्थानों पर तेज बारिश भी हुई. इस बारिश की वजह से दिन का तापमान सामान्य से लगभग 12 से 14 Degree सेल्सियस तक नीचे गया और रात के तापमान में भी थोड़ी कमी देखी गई.
फ़सल के लिए अच्छी रहेंगी बारिश
संभावना है कि पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव से 1 जून तक मौसम परिवर्तनशील बना रहेगा. इस दौरान 28 व 29 मई को भी बीच-बीच में ज्यादातर क्षेत्रों में आंशिक बादलवाई और गरजचमक व हवाएं के साथ हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है. लेकिन 29 मई रात से एक और पश्चिमी विक्षोभ के आने से 30 मई से 1 जून के दौरान भी राज्य के उत्तर पश्चिमी व दक्षिण क्षेत्रों में हवाओ व गरज चमक के साथ छोटी मोटी बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है. पिछले तीन महीने में 19 बार पश्चिमी विक्षोभ आए जैसे March महीने में 1, 4, 12, 17, 20, 24 और 30 मार्च कों अप्रैल में 3, 11, 18, 23, 27, 29 और मई में 4, 13, 17, 23, 26 और 29 मई शामिल है. यह बारिश नरमा की अगेती और पछेती दोनों प्रकार की फसलों के लिए अच्छी रहने वाली है. धान की खेती के लिए Nursery तैयार करने में भी यह वर्षा सहायता करेगी.

