Mahashivratri: रावण ने महादेव को चरणों में चढ़ाया था अपना 10वां सिर, दिल्ली से महज 38Km दूर ये मंदिर
गाजियाबाद :- महाशिवरात्रि के अवसर पर लोग शिव शंकर को मनाने के लिए पूजा, व्रत, तीर्थ करते है. वही महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु शिव शंकर के दर्शन करने के लिए बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे पवित्र स्थानों की यात्रा करते है. वही आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है, जहां पर महाशिवरात्रि के अवसर पर रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है. यहां जलाभिषेक करना काफी पवित्र माना जाता हैै. रुद्राभिषेक के लिए यहां पर देश- विदेशो से श्रद्धालु आते है.

जलाभिषेक के देश विदेशों से आते है श्रद्धालु
गाजियाबाद में प्राचीन दूधेश्वरनाथ शिव मंदिर स्थित है. महाशिवरात्रि पर यहां रुद्राभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ जाती है. दिल्ली- NCR के साथ- साथ विदेशो से भी श्रद्धालु दूर- दूर से यात्रा करके यहां आते है. मंदिर संचालको ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थी. यहां पर महाशिवरात्रि के 1- 2 दिन पहले ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो जाती है. मंदिर तक जाने के लिए शहीद स्थल Metro स्टेशन पर उतरकर Auto या रिक्शा के माध्यम से दूधेश्वरनाथ मंदिर तक पहुंचा जा सकता है.
लाखों की संख्या में आते हैं श्रद्धालु
मंदिर के महंत गिरीशानंद गिरी ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धालु 1- 2 दिन पहले ही मंदिर में पहुंचना शुरू कर देते है. प्रत्येक महाशिवरात्रि पर लाखो की संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आते है. इस बार भी उन्होंने 5- 6 लाख श्रद्धालुओ के आने की संभावना जताई है. दूधेश्वरनाथ मंदिर के बारे में कई प्राचीन मान्यताएं प्रचलित है. मान्यता है कि यहां पर रावण के पिता ऋषि विश्वश्रवा ने अपने बेटे कुबेर से मिलने के लिए तपस्या की थी.
रावण ने 10वां सिर काटकर महादेव को किया था समर्पित
इसके अलावा प्राचीन मान्यता है कि रावण ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए अपना 10वां सिर काटकर महादेव के चरणों में समर्पित कर दिया था. महंत गिरीशानंद ने बताया कि यहां पर 27 महंतो की समाधि है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इन समाधियों की भी पूजा अर्चना करते हैं. महाशिवरात्रि के अवसर पर वृंदावन के फूलों से इस मंदिर की सजावट की जा रही है. यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष भंडारे का आयोजन किया गया है.

