नई दिल्ली

आजादी के बाद पाकिस्तान चले गए थे इतने सैनिक, भारतीय सेना में बचे थे सिर्फ इतने मुसलमान

नई दिल्ली :- भारतीय सेना की बहादुरी के किस्से तो आपने कई सुने होंगे. देश की आजादी के बाद से अब तक इन यह सैनिक सरहदों को सुरक्षित रखने में अपनी-अपनी भूमिका निभाते आए हैं. फिर बात चाहें पाकिस्तान की हो या चीन की, भारतीय सेना ने हमेशा खुद को साबित किया है. हालांकि, हम यहां आपको उन सैनिकों के बारे में बताएंगे, जो कभी पाकिस्तान चले गए थे.

army

आजादी के बाद बंटे थे सैनिक

अंग्रेजों से मिली आजादी के बाद विभाजन की विभीषिका का इतिहास आपने किताबों में जरूर पढ़ा हुआ. जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो बहुत कुछ बंट गया. कई शहर, गांव, गलियां और बस्तियां, जो कभी समूचे हिंदुस्तान का हिस्सा थीं, उन्हें दो नए बने मुल्कों के बीच बांट दिया गया. नए बने भारत और पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए सेना की भी जरूरत थी, ऐसे में भारतीय फौज का भी बंटवारा हुआ. विभाजन के समय करीब 260,000 सैनिक, जो हिंदू और सिख थे, वे भारत में ही रुके. वहीं, 140,000 मुस्लिम सैनिक पाकिस्तान चले गए थे. इस तरह करीब भारतीय सेना के दो तिहाई सैनिक भारत के हिस्से में रहे. वहीं एक तिहाई सैनिक पाकिस्तान चले गए और वहां की फौज में शामिल हो गए.

इस आधार पर हुआ था सैनिकों का बंटवारा

देश के दो हिस्से धर्म के आधार पर हुए थे. मुस्लिमों के लिए पाकिस्तान था तो हिंदुओं व सिखों के लिए भारत. हालांकि, लोगों को यह अधिकार दिया गया कि वे अपनी मर्जी से भी देश का चुनाव कर सकते हैं. यही आधार भारतीय फौज के बंटवारे में भी रखा गया. सैनिकों का विभाजन दो आधार पर हुआ. पहला था धर्म, यानी धर्म के आधार पर सैनिक पाकिस्तान या भारत के बीच बांट दिए गए. वहीं, सैनिकों को यह भी आजादी दी गई कि वे अपनी स्वेच्छा से भारत या पाकिस्तान की फौज में शामिल हो सकते हैं. ऐसा माना जाता है कि विभाजन से पहले भारतीय सेना में 30 से 36 फीसदी मुसलमान सैनिक थे, लेकिन विभाजन के बाद भारतीय फौज में मुस्लिम सैनिकों की संख्या करीब दो फीसदी ही बची थी.

इस रेजिमेंट की टुकड़ी चली गई थी पाकिस्तान

भारतीय सेना में राजपूताना राइफल्स की बहादुरी के आपने कई किस्से सुने होंगे. इस रेजिमेंट में एक टुकड़ी मुस्लिम सैनिकों की भी थी. जब देश का बंटवारा हुआ था मुस्लिम सैनिकों की टुकड़ी पाकिस्तान चली गई और वहां की फौज में शामिल हो गई. इन मुस्लिम सैनिकों की टुकड़ी को बलूच रेजिमेंट से जोड़ा गया.

Sagar Parmar

हेलो दोस्तों मेरा नाम सागर परमार है मैं खबरी एक्सप्रेस पर बतौर कंटेंट राइटर के रूप में जुड़ा हूँ मेरा लक्ष्य आप सभी को हरियाणा व अन्य क्षेत्रों से जुडी खबर सबसे पहले पहुंचना है

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