प्याज की खेती करने वाले किसानों की हुई मौज, सरकार ने लिया ये टैक्स हटाने का फैसला
नई दिल्ली :- केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से प्याज पर 20% निर्यात शुल्क हटाने का ऐलान किया है. यह निर्णय किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने और बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए लिया गया है. उपभोक्ता मामलों के विभाग की सिफारिश के बाद राजस्व विभाग ने शनिवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, सरकार का यह कदम किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और प्याज की कीमतों को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है. रबी सीजन में बड़ी मात्रा में प्याज की फसल आने से थोक और खुदरा बाजार में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी. सितंबर 2024 से लागू निर्यात शुल्क के बावजूद प्याज का निर्यात 18 मार्च 2025 तक 11.65 लाख टन तक पहुंच गया. सितंबर 2024 में प्याज का निर्यात 0.72 लाख टन था, जो जनवरी 2025 में बढ़कर 1.85 लाख टन हो गया.

रबी फसल की आवक बढ़ने के कारण महाराष्ट्र के लासलगांव और पिंपलगांव जैसे प्रमुख थोक बाजारों में प्याज की कीमतों में गिरावट आई. लासलगांव मंडी में 21 मार्च को प्याज की कीमत 1,330 रुपये प्रति क्विंटल थी. पिंपलगांव मंडी में यह 1,325 रुपये प्रति क्विंटल रही. पिछले एक महीने में प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमतों में 10% और थोक बाजार में 39% तक की गिरावट आई है. कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, इस साल रबी प्याज का उत्पादन 227 लाख टन होगा, जो पिछले वर्ष के 192 लाख टन से 18% अधिक है. भारत में कुल प्याज उत्पादन का 70 से 75% हिस्सा रबी फसल से आता है, जो अक्टूबर-नवंबर तक बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है.
सरकार को उम्मीद है कि अधिक उत्पादन से आने वाले महीनों में प्याज की कीमतों में और गिरावट हो सकती है. हालांकि, निर्यात शुल्क हटने से विदेशी बाजार में मांग बढ़ेगी, जिससे घरेलू कीमतों में कुछ वृद्धि भी संभव है. घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने 8 दिसंबर 2023 से 3 मई 2024 तक निर्यात प्रतिबंध लगाए थे. इसके बाद सितंबर 2024 में 20% निर्यात शुल्क लगाया गया, जिसे अब हटा दिया गया है. प्याज पर निर्यात शुल्क हटाने का असर किसानों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ेगा. जहां किसान बेहतर दाम मिलने की उम्मीद कर सकते हैं. वहीं, घरेलू बाजार में प्याज की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी संभव है.

