अब मेडिकल स्टोर वाले ऐसे ही नहीं बेच सकेंगे दवाइयां, सरकार ने बनाए नए नियम
नई दिल्ली :- बीमार व्यक्तियों को बीमारी से राहत दिलाने के लिए दवाई ही अमृत के समान होती है. वही अगर यदि मरीज को गलत दवा दे दी जाए तो यही दवा मरीज के लिए घातक सिद्ध हो सकती है. हमारे देश में अधिकतर रिटेल मेडिकल स्टोर्स पर फार्मासिस्ट स्वयं मौजूद न रहकर अन्य सहायक व्यक्तियों को Store पर छोड़ देते हैं, और फिर वही सहायक व्यक्ति मरीजों को दवाइयां देता है. इसलिए भारत के ड्रग नियामक DCGI ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर और फार्मेसी काउंसलिंग ऑफ इंडिया (FCOI) को खत लिखकर रिटेल मेडिकल स्टोर्स में फार्मासिस्ट के स्वयं मौजूद रहने और दवाइयों की बिक्री निगरानी में करने के आदेश दिए है.

फार्मासिस्ट स्वयं रहे स्टोर्स पर मौजूद
9 March को GCGA ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के Drug कंट्रोलर और FCOI को खत लिखा जिसमे उन्होंने लिखा कि रिटेल मेडिकल स्टोर्स में फार्मासिस्ट स्वयं मौजूद रहे और दवाइयों की बिक्री उनकी निगरानी में हो, और बिना सही मान्य प्रिस्क्रिप्शन के रिटेल मेडिकल की दुकानों से कोई प्रिस्क्रिप्शन दवाई की बिक्री न करें. वही DCGI डॉ राजीव सिंह रघुवंशी ने रिटेल फार्मेसी एक्ट 1947 के सेक्शन 42(A) और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1945 के नियम 65 के तहत क्रियान्वयन की बात कही. सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से देश में उच्च स्तरीय चिकित्सा उपकरणों के निर्माण और उनके बेहतर उपयोग में सफलता मिलेगी.
योजना के तहत पहली किस्त जारी
ड्रग रेगुलेटर मुंबई के IPA में राष्ट्रीय महासचिव सुरेश खन्ना ने बताया कि उन्होंने फार्मेसी के एक्ट 1947 के सेक्शन 42(A) Drug एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1945 के नियम 65 से जुड़े तथ्यों को उजागर किया. वही पिछले महीने प्रोडक्शन लिंकड इंसेंटिव (PIL) के अंतर्गत फार्मास्युटिकल्स विभाग ने फार्मास्युटिकल की पहली किश्त जारी है. इस योजना के अंतर्गत चयनित आवेदको को 166 करोड़ की प्रोत्साहन राशि की पहली किस्त जारी की है. इस योजना की शुरुआत वर्ष 2021 में फार्मास्यूटिकल विभाग द्वारा की गई थी.
55 आवेदकों का हो चुका चयन
वर्ष 2022 का वित्त वर्ष PIL योजना के लिए उत्पादन का पहला वर्ष है. बजट परिवय्य के रुप में DOP ने 690 करोड़ रुपए निश्चित किए हैं. फार्मास्युटिकल्स द्वारा लागू इस योजना के अंतर्गत 6 वर्षों की अवधि में 15000 करोड़ रुपये वित्तीय परिवय्य के तहत दिया. फिलहाल इस योजना के लिए करीब 55 आवेदको का चयन किया जा चुका है. जिसमे सूक्ष्म, मध्यम और लघु उद्यम शामिल है.

