Indian Railway: 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाएगी भारतीय रेलवे, जींद- सोनीपत रूट हुआ फाइनल
नई दिल्ली :- भारतीय रेलवे जल्द देश में नई 35 ट्रेनें चलाने की तैयारी में है. यह ट्रेनें ना तो डीजल से और ना ही बिजली से चलेंगी बल्कि इनकी जगह पर हाइड्रोजन गैस से चलने वाली ट्रेने चलाई जाएंगी. Indian Railway ने बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है. भारतीय रेल हेरिटेज हाइड्रोजन के तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाएगी. भारतीय रेलवे वर्ष 2030 से पहले शून्य कार्बन उत्सर्जन करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. इसलिए रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है.

देश में चलाई जाएंगी 35 हाइड्रोजन ट्रेने
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय रेलवे ने विभिन्न हेरिटेज Route पर प्रति ट्रेन 80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत और प्रति Route 70 करोड़ रूपये के ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हेरिटेज फॉर हाइड्रोजन के अंतर्गत 35 हाइड्रोजन Train चलाने का फैसला किया है. इसके अलावा उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे ने 111.83 करोड़ रुपए की लागत से ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मौजूदा डीजल Electrical मल्टीपल यूनिट रैक पर हाइड्रोजन फ्यूल सेल के मेट्रो फिटमेंट के लिए एक पायलट Project तैयार किया है.
जींद- सोनीपत रूट पर जल्द यह ट्रेन चलाई जाने की योजना
रेलवे मंत्री ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत उत्तरी Railway के जींद- सोनीपत सेक्शन पर वित्तीय वर्ष 2023- 2024 तक हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना है. जबकि कालका- शिमला जैसे हेरिटेज सर्किट पर सबसे पहले यह ट्रेनें चलाई जाएगी. इन रूटों के बाद धीरे- धीरे Railway अन्य रूटों पर भी इसके विस्तारीकरण का कार्य करेगी. रेल मंत्री ने बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लिया है, जिस पर तेजी से कार्य किया जाएगा.
प्रारंभिक ट्रेन निर्माण में आएगी अधिक लागत
हाइड्रोजन ट्रेने ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग स्वच्छ ऊर्जा स्त्रोत के रूप में सुनने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए हरित परिवहन प्रतियोगिता के की दिशा में बड़ा लाभ प्रदान करता है. भारतीय रेल के परिदृश्य में हाइड्रोजन आधारित ट्रेनो के परिचालन के लिए लगने वाली लागत स्थापित नहीं की गई है, उम्मीद की जा रही है कि हाइड्रोजन ईंधन ट्रेन सेट की प्रारंभिक लागत अधिक रहने वाले हैं जबकि ट्रेनों के निर्माण में वृद्धि के साथ- साथ यह लागत कम होती जाएगी.

