Wheat Price: साल भर में रोटी के दाम 50% बढ़े, आटे के दाम कम करने के लिए सरकार अपनाएंगी ये प्लान
नई दिल्ली :- गेहूं के भाव दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं, जोकि आम जनता के लिए एक बड़ी परेशानी बनी हुई है. सरकार ने गेहूं के दामों को निश्चित बनाए रखने के लिए गेहूं के निर्यात पर भी पाबंदी लगाई थी, परंतु गेहूं के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे. इसके बाद सरकार ने आटे का Export भी बैन कर दिया था, ताकि भाव में वृद्धि ना हो. परंतु सरकार के इतने प्रयत्नों के बाद भी गेहूं के दाम आसमान छू रहे है. सरकार द्वारा की जा रही कोशिशे नाकाम होती नजर आ रही है. केवल January 2023 में गेहूं के दामों में 7 से 10% तक की वृद्धि दर्ज की गई.

गेहूं का MSP 2,125 रुपए निर्धारित
सरकार ने इस वर्ष गेहूं का MSP 2,125 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, परंतु थोक मंडियों में गेहूं 3100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचा जा रहा है. यदि भाव में इसी तरह से वृद्धि होती रही तो आने वाले दिनों में आटा ओर भी महंगा होने वाला है, और आम जनता की पहुंच से भी बाहर होने वाला है. इसलिए सरकार को चाहिए कि गेहूं के बढ़ते दामों पर रोक लगाने के लिए जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाए. पिछले 1 वर्ष में आटा 40 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है.
गेहूं के दामों ने की लोगों की जेब ढीली
गेहूं की बढ़ती कीमतों ने लोगों के जेब खर्च को बढ़ा दिया है. गेहूं के दाम बढ़ने से आटा, मैदा और सूजी के भाव भी निरंतर बढ़ रहे हैं. पिछले 1 महीने में 15 से 20 फ़ीसदी तक इनके भाव बढ़ चुके हैं. मिल मालिकों को उम्मीद थी कि सरकार खुली Market में गेहूं की नीलामी करेगा परंतु ऐसा नहीं हुआ जिस वजह से मिल मालिकों को महंगे भाव पर ही गेहूं खरीदना पड़ रहा है. वही अब उम्मीद की जा रही है कि March- April में गेहूं का नया Stock आने से गेहूं के दाम कम हो जाए.
गेहूं का नया स्टॉक आने पर हो सकती हैं कीमते स्थिर
उम्मीद की जा रही है कि मंडियों में गेहूं का नया Stock आने से March- April में गेहूं की कीमतें कम हो जाए. यदि सरकार इससे पहले अपना Stock बेचती हैं तो भी गेहूं के दाम गिरने शुरू हो जाएंगे. वर्तमान में सरकारी गोदामों में करीब 115 लाख टन गेहूं है. बफर Stock की सीमा 75 लाख टन है, इस तरह कुल 41 लाख टन गेहूं अधिक है. यदि सरकार गेहूं को 15 दिनों में खुली मार्केट में बेच देती है तो आने वाले दिनों में गेहूं की कीमतें स्थिर हो सकती हैं.

