Jallianwala Bagh Massacre: आज के दिन 1650 राउंड गोलियों से मारे गए थे सैंकड़ों निहत्थे भारतीय, आपको भी हैरान कर देगा जलियांवाला बाग नरसंहार
नई दिल्ली, Special Story :- आज हमारा देश काफी तरक्की कर रहा है. भारत की आजादी को भी 75 साल हो गए हैं, परंतु देश के लिए यह आजादी इतनी भी आसान नहीं रही. भारत को आजाद करवाने के लिए लाखों लोगों ने अपनी जान का बलिदान दिया था. जब भी लोगों के बलिदान (Jallianwala Bagh Massacre) की बात आती है, तो सबकी जहन में सबसे पहला नाम जलियांवाला बाग हत्याकांड का आता है. बता दे कि 13 April 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जो कुछ हुआ था, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. उस दिन अंग्रेजों ने निहत्थे भारतीयों पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दी थी. जब आज की पीढ़ी जलियांवाला बाग नरसंहार के बारे में सुनती है, तो सभी काफी गर्व की अनुभूति होती है और उनका सीना गर्व से फूल जाता है.

जानिये आज का दिन क्यों है इतिहास में दर्ज
आज का दिन भारत के इतिहास में हमेशा ही जिंदा रहेगा. बता दे कि अब इस घटना को घटित हुए 103 साल हो चुके हैं, परंतु आज भी यदि हम इस घटना को याद करते हैं तो हमारी आंखों के आंसू नहीं रुकते. बता दें कि अमृतसर के उपायुक्त कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला (Jallianwala Bagh Massacre) बाग में 388 शहीदों की सूची थी. वहीं कई Unofficial Report में मरने वालों की सूचना एक हजार से ज्यादा भी बताई गई थी. इस घटना के बाद से ही भारत के लोगों ने अंग्रेजों की चीजों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया था.
कुछ ही मिनटों में लग गया था शवों का ढेर
रोलेट एक्ट के विरोध में जलियांवाला बाग में एक शांति सभा का आयोजन करवाया गया था. इस सभा में उपस्थित लोगों पर जनरल डायर नाम के एक अधिकारी ने गोलियां चलवा दी थी. अधिकतर लोग तो अंग्रेजों की गोलियों से खुद को बचाने के लिए कुएं में कूद गए थे. ऐसे ही देखते- देखते थोड़े समय (Jallianwala Bagh Massacre) बाद ही कुएं में शवों का अंबार लग गया. जहां कुछ समय पहले तक जलियांवाला बाग में लोगों की भीड़ दिखाई दे रही थी, कुछ मिनटों के बाद ही वहां शव ही शव नजर आने लगे. 13 April 1919 को 1650 राउंड गोलियां चलाई गई थी.
जलियांवाला बाग नरसंहार में शहीद हुई सभी दिव्य आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि. जनरल डायर द्वारा जलियांवाला बाग में अहिंसापूर्वक आंदोलन कर रहे निहत्थे व निर्दोष लोगों पर किए गए कायरतापूर्ण हमले की पीड़ा आज भी हमारे दिलों में जिंदा है.
— Khabri Express (@khabri_express) April 13, 2023
उधम सिंह ने लिया था जनरल डायर को मारकर बदला
जलियांवाला बाग हत्याकांड में मौजूद उधम सिंह ने 21 साल बाद 1940 में लंदन में जनरल डायर को गोली मारकर बदला लिया था, परंतु लंदन की अदालत (Jallianwala Bagh Massacre) ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी. इसके बाद भारतीयों में आजादी की आग तेज हुई और फिर 15 August 1947 को हमारा देश ब्रिटिश शासन से आजाद हो गया.आप ये लेख KhabriExpress.in पर पढ़ रहे है. आपकी इस पोस्ट के बारे मे क्या राय है मुझे कॉमेंट बॉक्स मे जरूर बताएं.

