Haryana News: हरियाणा राज्य महिला आयोग का बड़ा फैसला, अब सरपंच- पार्षद रोकेंगे बाल विवाह
चंडीगढ़ :- केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में बाल विवाह पर रोक लगाई गई है. इसके बावजूद भी लोग कम उम्र में बच्चों की शादियां करवा रहे हैं, जोकि मुख्य तौर पर Law का उल्लंघन है. हरियाणा राज्य महिला आयोग ने Child Marriage पर रोक लगाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं. अब से सुबो में सरपंच और पार्षद बाल विवाह रोकने का काम करेंगे. बाल्यावस्था में हुए विवाह ज्यादा समय तक नहीं टिकते, और ना ही बाल्यावस्था तक बच्चे पूर्ण रूप से परिपक्व होते हैं. इसलिए सरकार ने बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाने के लिए कुछ नियम कानून बनाएं है.

बाल विवाह रोकने में सरपंच और पार्षद करेंगे सहयोग
महिला आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अब बाल विवाह रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के सरपंच और शहरी क्षेत्रों में पार्षद कार्य करेंगे. पिछले कुछ वर्षों में एकत्रित आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले कुछ समय में बाल विवाह जैसे मामले 7% तक बढ़े हैं. समय तो बदल रहा है परंतु लोगों की सोच नहीं बदल रही, कानून बनने के बाद भी कुछ ग्रामीण या निजी क्षेत्रों में रहने वाले लोग सरकार द्वारा लागू कानूनों का उल्लंघन करते हैं. आप ये लेख KhabriExpress.in पर पढ़ रहे है. आपकी इस पोस्ट के बारे मे क्या राय है मुझे कॉमेंट बॉक्स मे जरूर बताएं.
बाल्यावस्था में विवाह कानूनी रूप से अवैध
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध विधेयक 2020 लाया गया था. इसके अंतर्गत 15 से 18 साल के लड़का- लड़की के वैवाहिक संबंध पूर्ण रूप से अवैध है. इसके बावजूद भी वर्ष 2020 के बाद से बाल विवाह जैसे मामलों में बड़ी संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्ष 2015- 2016 में बाल विवाह की दर 12.5 प्रतिशत थी जोकि 2019- 2020 में बढ़कर 19.4 प्रतिशत और 2020 से 21 में बढ़कर 33 प्रतिशत तक पहुंच गई. फिलहाल 2021 से बाल विवाह में 7 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई.
बड़े स्तर पर आ रहे बच्चों की गुमशुदगी के मामले
बढ़ते बाल विवाह का असर हरियाणा में भी देखने को मिल रहा है. राष्ट्रीय स्तर की संस्था द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के 2 जिले देश के स्तर पर भी सबसे ज्यादा पिछड़े हुए है. Report के हिसाब से हिसार और मेवात ऐसे जिले है जहां पर कम उम्र की किशोरियों के गर्भधारण जैसे मामले सामने आ रहे हैं. वर्ष 2021 में बच्चों के गुमशुदगी की रिपोर्ट भी बहुत बड़े स्तर पर सामने आ रही है. वर्ष 2021 में बच्चे चोरी से संबंधित कुल 21 मामले सामने आए हैं, जिसमें 20 लड़कियां और एक लड़का शामिल है.

