UP की सिंगर कैसे बन गई हरियाणा की जान, छोटी उम्र में रेणुका पँवार ने बनाई बड़ी पहचान
मनोरंजन :- हरियाणवी गानों को आवाज देने वाली मशहूर सिंगर रेणुका पँवार को हरियाणा में आज लगभग सभी व्यक्ति जानते हैं. UP की इस सिंगर ने हरियाणवी गानों के जरिए हरियाणा में अपनी धमाकेदार पहचान बनाई है. लोग इनकी आवाज के इतने दीवाने हैं कि इनके सॉन्ग आज हर Party की शान बढ़ाते है. छोटी सी उमर में इन्होंने अपनी आवाज के जरिए एक अलग पहचान बनाई है. इन्होंने बड़े संघर्ष के बाद यह मुकाम हासिल किया है.

बड़ी संघर्ष के बाद मिली कामयाबी
रेणुका पँवार ने अपने बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पहले मुझे कुछ लोग देखना पसंद नहीं करते थे, उन्हें यह प्रोफेशन बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था. लोग उनके Parent’s को भड़काते थे, कहते थे कि गाना गाने से बेहतर है कुछ अच्छा पढ़ लेती. इसके बावजूद भी उन्होंने अपने इस प्रोफेशन को नहीं छोड़ा. अपने पुराने दिनों को याद करते हुए रेणुका ने बताया कि वह और उसका भाई दोनों दिन -रात Studio के चक्कर काटते थे परंतु हर जगह से उन्हें केवल मायूसी ही हाथ लगती, इसके बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी और कोशिश करती रही.
16 वर्ष की आयु में ही शुरू कर दी थी सिंगिंग
इसके बाद रेणुका पँवार ने बताया कि वह फिलहाल 19 वर्ष की है, और उन्होंने 16 वर्ष की आयु से ही गाना गाना शुरू कर दिया था. वह बचपन से Dance की शौकीन थी परंतु उसके पेरेंट्स डांस को अच्छा नहीं मानते थे. जिस वजह से उन्होंने Dancing के साथ साथ Singing को भी अपनी हॉबी बना लिया. जब वह खेकड़ा के स्कूल में पढ़ती थी तो वह वहां सिंगिंग में भाग लेने लगी और धीरे-धीरे 9वीं कक्षा तक वह सिंगिंग में बिल्कुल माहिर हो गई. जब वह 12वीं कक्षा में हुई तो कहीं ना कहीं बाहर गाने गाती थी परंतु कोई बड़ा मौका हाथ नहीं लग रहा था.
एक के बाद एक दिया बेहतरीन सॉन्ग
इसके बाद उसने बताया कि कुछ समय बाद उसने हरियाणा का रुख किया और बड़ी कामयाबी हासिल की. यहां आकर उन्हें कई हरियाणवी गानों को आवाज देने का मौका मिला. उन्होंने ’52 गज का दामण’ से हरियाणा में अपने कैरियर की शुरुआत की, जिसमें उसे बड़ी उपलब्धि हासिल हुई. फिर उनके एक के बाद एक Song जैसे मण मण के डुंगे मारगी छमकछल्लो, मेरा चुनर मंगा दे बलमा शहर से, गज का घूंघट आदि कई Song आए. उसने बताया कि आज मुझे बहुत खुशी होती जब लोग अपनी बेटियों को कहते हैं कि बेटा बड़ी होकर दीदी जैसी ही बनना.

