HPSC: हरियाणा में सरकारी नौकरियों के लिए अब संस्कृत होनी जरूरी, विभाग ने बिना किसी अधिसूचना के थोपा नया नियम
चंडीगढ़ :- पहले ही नियमों में उलझ कर युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. विभाग की तरफ से नियमों में कई प्रकार के बदलाव किए जा रहे हैं. हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन (HPSC) की तरफ से किए गए एक और बदलाव की वजह से भर्तियों कों हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. कमीशन कानून में बिना संशोधन के नियमों में बदलाव कर रहा है.

बिना संशोधन के थोपे जा रहे है नए नियम
इन बदलावों के तहत भर्तियों में दसवीं में हिंदी या संस्कृत अनिवार्य विषय है. बता दें कि कुछ समय पहले सरकार की तरफ से यदि हिंदी में यह विषय नहीं है, तो हायर एजुकेशन यानी MA तक में हिंदी विषय है तो उसे मान्य करने की अधिसूचना जारी की गई थी. अब हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन ने हिंदी के साथ-साथ संस्कृत Subject को भी ऐड कर दिया है. इसको लेकर कोई भी अधिसूचना जारी नहीं की गई है, ऐसे में यदि किसी ने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी तो यह भर्ती लटक सकती है.
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट ने दी जानकारी
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि जब हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव के सीधे अधीन आने वाले सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आज तक जारी सरकारी हिदायतों के अनुसार प्रदेश में हर सरकारी पद पर नियुक्त करने के लिए मैट्रिक में हिंदी और संस्कृत विषय होने अथवा उच्चतर शिक्षा हिंदी विषय में होने के स्पष्ट निर्देश है. हेमंत ने बताया कि आरंभ से ही प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए मैट्रिक में Hindi विषय होना अनिवार्य था ना कि संस्कृत.
संस्कृत विषय को लेकर नहीं मिली कोई भी जानकारी
16 साल पहले May 2007 में प्रदेश में तत्कालीन हुड्डा सरकार की तरफ से सरकारी नौकरियों के लिए मैट्रिक में हिंदी के साथ-साथ संस्कृत को भी हिंदी के समान माना गया था. इसके करीब सवा दो साल बाद अगस्त 2009 में हायर एजुकेशन में भी हिंदी विषय वाले को ही सरकारी नौकरी के योग्य मान लिया गया. सवा 4 साल पहले फरवरी 2019 में मुख्य सचिव के सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से जारी एक और सर्कुलर पत्र में भी ऐसा ही उल्लेख किया गया, परंतु हायर एजुकेशन में संस्कृत विषय हो इसको मानने का कोई आदेश नहीं है.

